Saturday, April 3, 2010

गूगल ला रहा है एंड्रॉइड सेटटॉप बॉक्स

न्यूयॉर्क. गूगल ने डिश के साथ मिलकर एंड्रॉइड प्लेटफार्म से चलने वाले टेलीविजन सेटटॉप बॉक्स लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके बाजार में आने के बाद टीवी दर्शकों को यू-ट्यूब, मेटाकैफे और इंटरनेट पर उपलब्ध कई मीडिया चैनलों के उपयोग करने का मौका मिलेगा।



इससे दर्शक अपने पसंदीदा गानों और वीडियो की सूची बनाने के बाद टीवी में अलग से की-बोर्ड जोड़कर इंटरनेट व अन्य कार्यक्रमों का भी आनंद ले सकेंगे। गूगल ने यह सेवा लोगों को मुफ्त देने के बदले इनमें विज्ञापनों के जरिए पैसा कमाने की योजना बनाई है।

सिकुडता जा रहा है मानव का मस्तिष्क

नयी दिल्ली. मानव का मस्तिष्क सिकुडता जा रहा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मनुष्य की दिमागी क्षमता में कमी हो रही है बल्कि उसका मस्तिष्क सिकुडते कम्प्यूटर की तरह ज्यादा कुशल बनता जा रहा है।

फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने 1868 में पेरिस के दोर्दान में एक गुफा से पांच पुराने कंकालों के बीच मिली बीस हजार साल पुरानी एक खोपडी की अनुकृति का अध्ययन करने के बाद बताया है कि यह वर्तमान

मनुष्य की खोपडी से 20 प्रतिशत तक बडी है।



यह खोपडी क्रो मैगनन मानव प्रजाति से संबंधित थी। यह फ्रांस के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय में रखी हुई है। वैज्ञानिक दल ने इसकी अनुकृति तैयार की है। जिसके बारे में उनका दावा है कि यह आधुनिक युग के प्रारंभिक मानव की खोपडी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ अनुकृति है।



वैज्ञानिकों का कहना है कि खोपडी के बडे होने का यह मतलब नहीं है कि मनुष्य के पूर्वज ज्यादा बुद्धिमान थे। अध्ययनों से पता लगा है कि मस्तिष्क के आकार और आर्ईक्यू, सामान्य बुद्धिमत्ता, के बीच बहुत मामूली संबंध होता है। वैज्ञानिकों के इस शोध से मानव विकास के एक महत्वपूर्ण सवाल पर रोशनी पड सकती है कि यदि मनुष्य का मस्तिष्क सिकुडता जा रहा है तो इसकी वजह क्या है।



यह सवाल विशेषज्ञों को परेशान करता रहा है और इस पर उनके बीच मतभेद हैं। समझा जाता है कि यह खोपडी किसी सुगठित अधेड व्यक्ति की है, जो लगभग छह फुट लंबा था। इस खोपडी के बारे में दुनिया भर के वैज्ञानिक पहले से ही जानते हैं लेकिन जल्दी ही यह और प्रसिद्ध हो जाएगी।



जब वाशिंगटन में अमरीका के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय में इसकी अनुकृति को प्रदर्शित किया जाएगा। पेरिस के कुइंज विंग्ट्स अस्पताल में खोपडी के आंतरिक भाग का स्कैन करके इस अनुकृति को तैयार किया गया था ताकि मस्तिष्क से तंत्निका कपाल, न्यूरोक्रैनियम, पर पडे प्रभाव की तस्वीर ली जा सके।

पच्चीस साल का हुआ डॉट कॉम

इंटरनेट की दुनिया में आज का दिन काफ़ी अहम है. अहम इसलिए क्योंकि आज डोमेन नेम डॉट कॉम की 25वीं सालगिरह है। आज से ठीक 25 साल पहले 15 मार्च 1985 को कंप्यूटर बनाने वाली एक कंपनी सिम्बॉलिक्स ने अपने नाम में डॉट कॉम जोड़ा था।
और आज 25 साल बाद क़रीब-क़रीब एक लाख डॉट कॉम वेबसाइट्स हर दिन रजिस्टर्ड होती हैं। बीबीसी के तकनीकी मामलों के संवाददाता मैगी शिल्स का कहना है कि 80 के दशक के आख़िर और 90 के दशक के शुरू में इक्का-दुक्का ही ये जानता था कि ये डॉट कॉम क्या है। लेकिन आज डॉट कॉम हमारे जीवन का हिस्सा है और इंटरनेट की दुनिया में मील का पत्थर।

विकास

आज लोग डॉट कॉम की दुनिया में गोते लगाकर शॉपिंग कर सकते हैं, मनोरंजन कर सकते हैं, नई चीज़ें सीख सकते हैं, विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं, छुट्टियों की योजना बना सकते हैं और भी बहुत कुछ कर सकते हैं।


वर्ष 1985 में सिर्फ़ छह डॉट कॉम डोमेन नेम रजिस्टर हुए थे। आज क़रीब आठ करोड़ 60 लाख सक्रिय वेबसाइट्स हैं और 11 करोड़ 30 लाख वेबसाइट्स आईं और गईं। वर्ष 1997 तक डॉट कॉम डोमेन नेम का आँकड़ा 10 लाख भी नहीं पहुँचा था। लेकिन इसी साल इंटरनेट के क्षेत्र में आई उछाल ने तस्वीर बदल कर रख दी।
इसी के साथ डॉट कॉम की दुनिया में भी धमाका हुआ और अगले दो साल में क़रीब दो करोड़ डोमेन नेम रजिस्टर हुए। डॉट कॉम डोमेन नेम की निगरानी करने वाली कंपनी वेरीसाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क मैकलॉगलिन का कहना है कि दरअसल हम इंटरनेट का जश्न मना रहे हैं और डॉट कॉम इंटरनेट का चर्चित और जाना-पहचाना चेहरा है। 25 साल पहले किसने कल्पना की थी कि इंटरनेट आज ऐसी स्थिति में होगा। मैकलॉगलिन का मानना है कि इंटरनेट के इस्तेमाल में नित-नए बदलाव हो रहे हैं और आने वाले दिनों में इसमें और बदलाव होंगे।

अब बोतल में ताजी हवा

लंदन. airशहरवासियों में बढ़ रहे तनाव को अब बोतलबंद हवा कम करेगी। बोतलबंद हवा पेश करने वाले नेशनल ट्रस्ट का मानना है कि हवा का हर जार कम से कम दस मिनट का तनाव खत्म करेगा। ब्रिटेन के समुद्री किनारों और ग्रामीण क्षेत्रों की यह हवा तमाम खुशबुओं में उपलब्ध होगी।



खुले स्थानों और ऐतिहासिक भवनों की रक्षा में लगे नेशनल ट्रस्ट के प्रवक्ता एंड्रू मैक्लिन के अनुसार बोतलों में बंद यह ताजी हवा देश के कुछ पसंदीदा स्थानों से उपलब्ध कराई जाएगी। ट्रस्ट को बोतलबंद हवा का विचार एक सर्वे के बाद आया। इस सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी लोगों का मानना है कि ताजी हवा में सांस लेना उनके तनाव को काफी कम कर देता है। सर्वे में शामिल 72 फीसदी लोगों का मानना है कि समुद्री किनारे की हवा उनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है।

फेसबुक पर ‘पैनिक बटन’ लगाने का दबाव

facebookलंदन. ब्रिटेन की सरकार सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक पर दबाव डाल रही है कि वह अपने वेब पेजेस पर एक ‘पैनिक बटन’ उपलब्ध कराए। ताकि बच्चे किसी तरह का खतरा महसूस होने पर इसका इस्तेमाल कर तुरंत पुलिस की मदद मांग सकें।

सरकार ने यह कदम एक व्यक्ति द्वारा फेसबुक पर मिली एक किशोरी की हत्या के बाद उठाया है। आरोपी पीटर चैपमेन ने 17 वर्षीय एशलीघ हाल से दोस्ती करने के लिए फेसबुक पर अपनी गलत पहचान बताई थी। इसके बाद उसने एशलीघ का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के उपनेता हैरिएट हरमन ने कहा कि इस घटना के बाद से ही फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्किग साइटों को पैनिक बटन उपलब्ध कराने के लिए कहा जा रहा है।

एमएसएन लाएगा फ्री ऑनलाइन वीडियो

Bhaskarबीबीसी के आई-प्लेयर और चैनल फोर के ऑन डिमांड सर्विस के मुकाबले माइक्रोसॉफ्ट फ्री ऑनलाइन वीडियो सुविधा की शुरुआत करेगा। इसमें यूजर्स को कुछ कॉमेडी शो और लोकप्रिय धारावाहिकों को मुफ्त देखने की छूट दी जाएगी। हालांकि एमएसएन का यह भी कहना है कि इसेक बदले यूजर्स को शो की शुरुआत से लेकर बीच-बीच में कई विज्ञापन भी झेलने होंगे। वीडियो को लोकप्रिय बनाने के लिए एमएसएन कई धारावाहिक निर्माताओं और फिल्म कंपनियों से करार करने की कोशिश कर रहा है। एमएसएन ने कहा कि इस ऑनलाइन वीडियो सेवा को माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग कंसोल एक्सबॉक्स 360 से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

कर्मचारियों पर नजर रखेगी नई तकनीक

cellजापान की एक फोन कंपनी ने एक ऐसी तकनीक बाजार में पेश की है, जिसके जरिए बॉस अपने कर्मचारियों के मोबाइल फोन कॉल्स पर नजर रख सकेगा। केडीडीआई कॉपरेरेशन की इस तकनीक में एक कैमरा कर्मचारियों के मोबाइल फोन कॉल्स की संख्या को ट्रैक करेगा। कैमरा यह देखेगा कि कर्मचारी को कितने कॉल्स आते हैं और वह कितनी बार अपनी सीट से उठकर उन्हें अटैंड करने बाहर जाता है। यह जानकारी कंपनी के मुख्यालय को भेजी जाएगी। केडीडीआई कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया कि नई तकनीक से कर्मचारियों के व्यवहार का बेहतर तरीके से आकलन किया जा सकेगा। इसके अलावा उनके कामकाज को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

हाई-टेक होंगे भविष्य के टॉयलेट

toiletजापान के कुछ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में ऐसे हाई-टेक टॉयलेट लगाए गए हैं, जो किसी स्टारशिप के पायलट की सीट से कम नहीं हैं। इनमें मोशन सेंसर फ्लश, ऑटोमेटिक कंट्रोल पैनल, डीऑडोराइजिंग फीचर्स, खास साउंड इफेक्ट्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। इसके अलावा इसमें हीटेड व सेल्फ क्लीनिंग सीट्स सुविधा भी होगी। ये टॉयलेट पूरी तरह से पेपरलेस होंगे।

आप क्या सोच रहे हैं, बताएगा टेलीपैथी कम्प्यूटर

नयी दिल्ली. अब आपके विचार गोपनीय नहीं रहे। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टेलीपैथी कम्प्यूटर विकसित करने में कामयाबी हासिल कर ली है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति क्या सोच रहा है।

व्यक्ति के मस्तिष्क के स्कैन के दौरान इस कम्प्यूटर के जरिए उसके विचारों की बनावट का मतलब निकालकर बताया जा सकता है कि उसके दिमाग में क्या विचार उठ रहे हैं। इस नये अनुसंधान को पिछले साल किए गए अध्ययन का अगला कदम माना जा सकता है।



जब इन्हीं शोधकर्ताओं ने एक कमरे के आसपास एक व्यक्ति की गतिविधियों का पता लगाने के लिए इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया था। लेकिन नये शोध में जो कम्प्यूटर विकसित किया गया है, वह व्यक्ति की स्मृतियों को पता लगाने के साथ ही विभिन्न स्मृतियों के बीच फर्क भी बता सकता है।

करेंट बायलोजी में आनलाइन प्रकाशित यह अध्ययन हिप्पोकैम्पस पर केन्द्रित किया गया। हिप्पोकैम्पस दिमाग के बीच में एक ऐसा स्थान है जो अल्पावधि स्मृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

टेलीपैथी कम्प्यूटर से लाई डिटेक्टर, झूठ का पता लगाने वाला यंत्न, के क्षेत्न में संभावनाएं बढ गई हैं क्योंकि यह स्मृतियों की युक्तियों का पता लगाने की दिशा में भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है। जैसा कि 'द ईटर्नल सनशाइन आफ द स्पाटलेस माइंड' फिल्म में दिखाया गया है।

अब आप गूगल पर आवाज से भी कर सकेंगे सर्च


और हिंदी में सर्च करने के बाद अब गूगल पर आवाज से सर्च किया जा सकेगा। इसका फायदा वो लोग भी उठा सकेंगे जो न तो हिंदी में सर्च कर सकते हैं और न अंग्रेजी में। गूगल इंडिया के उत्पाद प्रबंधक जगजीत चावला ने यहां कहा कि मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले गूगल में जाकर जो कुछ भी कहेंगे, वह सर्च होकर सामने आ जाएगा। यह बात अन्य भारतीय भाषाओं में भी कही जा सकती है।



उन्होंने कहा कि इंटरनेट ने भारत में सात करोड़ लोगों के जीवन को छुआ है। इनमें 13 प्रतिशत लोग अंग्रेजी जबकि बाकी हिंदी व अन्य भाषाओं में इसका उपयोग पसंद करते हैं। इस सुविधा से एक बड़ा वर्ग इंटरनेट का लाभ ले सकेगा।

दीवारों के आर-पार देख सकेगा मोबाइल

bhaskarसिडनी. यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जो एक्स-रे के सहारे यह पता लगा सकता है कि दीवार से दूसरी ओर कौन है और वहां क्या हो रहा है। सॉफ्टवेयर के विकासकर्ता क्रिश्चियन सेंडोर ने कहा कि यह एप्लीकेशन फोन के कैमरे के साथ मिलकर काम करता है। इसे डाउनलोड करने के बाद यूजर जब किसी बिल्डिंग की ओर कैमरा घुमाएगा तो उसे उसके अंदर हो रही गतिविधि के बारे में थ्री-डी तकनीक के जरिए सारी जानकारी मिल जाएगी। सॉफ्टवेयर के निर्माताओं ने इस तकनीक के उपयोग के लिए नोकिया कंपनी के साथ समझौता किया है। कंपनी अगले दो साल में इसे बाजार में पेश करेगी।

थ्री-डी टीवी बनाएंगे सोनी, सैमसंग


bhaskarटोक्यो. थ्री-डी तकनीक इसी साल से टेलीविजन में भी प्रवेश कर जाएगी। सोनी और सैमसंग ने इसका ऐलान कर दिया है। सोनी इस साल ढाई करोड़ एलसीडी टीवी बाजार में लाएगी, जिनमें से 10 फीसदी थ्री-डी तकनीक से लैस होंगे। इसके अलावा सोनी ने थ्री-डी गेम सॉफ्टवेयर भी पेश करने की योजना बनाई है। सैमसंग ने 46 और 55 इंच आकार वाले थ्री-डी टीवी अगले कुछ महीनों में लाने का घोषणा की है। थ्री-डी टीवी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही फिल्म व धारावाहिकों के निर्माता तेजी से एनीमेशन तकनीकों की ओर मुड़ेंगे। अब देखना यह है कि एचडीटीवी तकनीक वाले टीवी खरीदने वाले अपने सेट को अपडेट करने को कितने तैयार होते हैं।

अब आया 3-डी अख़बार

ला डार्नियर पढ़ता एक व्यक्ति
अब तक आप केवल 3-डी फ़िल्मों और वीडियो गेम के बारे में ही सुनते आए होंगे लेकिन अब एक अख़बार ने भी 3-डी अंक प्रकाशित करने का प्रयोग किया है.
बेल्जियम में फ़्रेच भाषा में छपने वाले एक अख़बार ने यूरोप का पहला 3-डी (त्रिआयामी ) अंक प्रकाशित किया है.
अख़बार ला डार्नियर ह्यूर (डीएच) ने अपने इस विशेषांक के सभी फ़ोटो और विज्ञापन को थ्रीडी प्रारूप में प्रकाशित किया है. लेकिन इसकी शेष सामग्री सामान्य है.
अख़बार के इस विशेषांक को मोटे कागज़ से बने हुए चश्मे की मदद से देखा जा सकता है.

महंगा अख़बार

ला डार्नियर ह्यूर के संपादक कहना है कि इस 3-डी अंक की लागत को देखते हुए इस तरह के और अंक छापे जाने की कोई योजना नहीं है.
फ़्रांस के विश्लेषकों ने अख़बार के इस साहसिक क़दम को सलाम किया है लेकिन कहा है कि यह अभी यह पूरी तरह दोषरहित होने से काफ़ी दूर है.



अख़बार के संपादक ह्यूबर्ट लेकलर्क ने बताया कि इस विशेषांक को तैयार करने में दो महीने का समय लगा. यह सामान्य अख़बार की एक लाख 15 हज़ार प्रतियों के छापने में लगने वाले समय से बहुत अधिक था.
लेकलर्क ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, ''हमने 3-डी सिनेमी, टीवी और वीडियो गेम के बारे में सुना था इसलिए हमने यह चुनौती स्वीकार की.''
पीसी वर्ल्ड के फ़्रेच संस्करण के मुतबिक़ आँखों से 50 सेंटीमीटर की दूरी पर रखकर पाठक इसे आसानी से देख सकते हैं.
इसके मुताबिक़ ''केवल कुछ मिनटों में ही आँखें थ्री डी तस्वीरों को देखने की अभ्यस्त हो जाती हैं. इसके लिए किसी विशेष तरह के चश्मे की ज़रूरत नहीं होती.''
पीसी वर्ल्ड के मुताबिक़ कुछ तस्वीरों, ख़ासकर विज्ञापनों में अच्छा 3-डी प्रभाव है लेकिन बाकी की तस्वीरें अस्पष्ट हैं या उनको देखना कठिन है.

इंटरनेट तक पहुंच को मिले मौलिक अधिकार का दर्जा

bhaskarलंदन. इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर अब दुनिया भर में इस तक पहुंच को मौलिक अधिकार बनाने की मांग जोरदार ढंग से उठने लगी है। बीबीसी वल्र्ड सर्विस के लिए ग्लोब स्कैन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से यह नतीजा सामने आया है। यह सर्वेक्षण भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको और नाइजीरिया सहित 26 देशों में हुआ। इसमें 27,000 लोगों ने भाग लिया था।



सर्वेक्षण में 87 फीसदी लोगों ने नेट तक पहुंच को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग का समर्थन किया है। इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के महासचिव डॉ. एच टूरे का मानना है कि अभिव्यक्ति के अधिकार की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। इंटरनेट ज्ञानवर्धन का अब तक का सबसे प्रभावी साधन है। हम एक ज्ञानवान समाज का हिस्सा हैं और सबको नेट तक पहुंच सुलभ होनी चाहिए।



सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर लोगों का मानना है कि नेट ने उन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। पांच में से चार लोगों का मानना है कि इसने उन्हें आजादी दी है। उल्लेखनीय बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने भी वैश्विक स्तर पर नेट तक पहुंच बनाने की वकालत की है।

अब आपका दरवाजा खोलेगा एप्पल-की

लंदन. आने वाले दिनों में आपकी कार, बाइक और आपके घर के सभी दरवाजे एक ही चाबी से खुलेंगे। एप्पल ने एक क्रांतिकारी इलेक्ट्रॉkeyनिक उपकरण बनाया है। इसे दरवाजे के एक तरफ लगाकर आप चैन की नींद सो सकते हैं। डिवाइस में एक यूनीक पिन कोड होगा। इसे दबाकर और इलेक्ट्रॉनिक चाबी को उपकरण के सामने लहराकर आप दरवाजा खोल सकेंगे। एप्पल को फिलहाल अपने इस नए उपकरण के पेटेंट का इंतजार है। कंपनी इस तकनीक को आने वाले दिनों में अपने आईफोन पर भी इस्तेमाल कर सकती है। तब आपका मोबाइल फोन ही दरवाजा खोलने के लिए काफी होगा।

वाहन चोरी से निपटेगा पीडीए


हैदराबाद. शहरों में गाड़ियों की चोरी एक बड़ी समस्या है। सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी किसी गाड़ी को देखकर यह नहीं जान पाते कि वह चोरी की है या नहीं। अब ऐसी सभी चोरी की गाड़ियों के नंबर का डेटाबेस बनाया जा रहा है। डीजीपी ऑफिस में बन रहे इस डेटाबेस को पुलिसकर्मियों के पीडीए पर शिफ्ट किया जाएगा। इससे वाहनों की चेकिंग के समय वे पीडीए पर नंबर का मिलान करेंगे। संदिग्ध या चोरी की गाड़ी होने पर पीडीए अलार्म बजाएगा। इससे उन्हें वाहन चोरों को पकड़ना आसान हो जाएगा। पीडीए में ई-चालान फार्म डालने की भी योजना है, ताकि पुलिस को रसीद-कट्टे से छुटकारा मिले।

मंगल के रहस्यों को उजागर करती कुछ एक्सक्लूसिव तस्वीरें





ये तस्वीरें किसी कलाकार के मन की उपज नहीं, बल्कि प्रकृति की कलाकारी के अनोखे उदाहरण हैं। इन चित्रों को देख कर ऐसा लगता है कि प्रकृति ने ब्रश लेकर कैनवास पर जादू बिखेर दिया है। ये तस्वीरें मंगल ग्रह की हैं जहां तक पहुंच पाना अभी मनुष्य जाति के लिए संभव नहीं हो सका है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह की अनोखी सुंदरता को कैमरे में कैद करने में सफलता हासिल कर ली है। ये तस्वीरें नासा के अंतरिक्ष यान मार्स रिकोनाइजर ऑरबिटर से ली गई हैं। नासा ने इस यान से भेजी गई 11,762 तस्वीरों को सर्वाजनिक किया है। इन तस्वीरों में दिख रही नीली आभा बेसल्ट चट्टानों और कार्बन डाईऑक्साइड से बने बर्फ के कारण है।




अंतरिक्ष यान ने यह सफलतानासा ने मंगल ग्रह की अनोखी सुंदरता को कैमरे में कैद करने में सफलता हासिल कर ली है। ये तस्वीरें नासा के अंतरिक्ष यान मार्स रिकोनाइजर ऑरबिटर से ली गई हैं। नासा ने इस यान से भेजी गई 11,762 तस्वीरों को सर्वाजनिक किया है। इन तस्वीरों में दिख रही नीली आभा बेसल्ट चट्टानों और कार्बन डाईऑक्साइड से बने बर्फ के कारण है।


अंतरिक्ष यान ने यह सफलता अपनी यात्रा के चौथे साल में हासिल की है। इसे 12 अगस्त 2005 को फ्लोरिडा से लॉन्च किया गया था। ताकि मानव मिशन की तैयारियों के लिए जानकारी इकट्ठा की जा सके, जिसमें यह काफी हद तक कामयाब रहा है। मंगल पर मानव भेजने में लगे वैज्ञानिकों को इन तस्वीरों से बहुत मदद मिलने की उम्मीद है। अपनी यात्रा के चौथे साल में हासिल की है। इसे 12 अगस्त 2005 को फ्लोरिडा से लॉन्च किया गया था। ताकि मानव मिशन की तैयारियों के लिए जानकारी इकट्ठा की जा सके, जिसमें यह काफी हद तक कामयाब रहा है। मंगल पर मानव भेजने में लगे वैज्ञानिकों को इन तस्वीरों से बहुत मदद मिलने की उम्मीद है।




जेब में समा जाए की-बोर्ड


आरआईआई मिनी वायरलैस की-पैड कई खूबियों वाला है। इसमें 2.4 गीगाहट्र्ज वायरलैस यूएसबी डोंगल लगा है। इससे आप इसे अपने कंप्यूटर और स्मार्टफोन दोनों से जोड़ सकते हैं। इसमें एक टचपैड भी है, जो आपके लिए माउस का काम करेगा। इसकी कीमत 92 डॉलर (4324 रु.) है।

तीन साल बाद बेकार हो जाएगा डेस्कटॉप


लॉस एंजिलिस. गूगल ने दावा किया है कि अगले तीन साल में डेस्कटॉप कंप्यूटर दुनियाभर में लगभग गायब ही हो जाएंगे। कंपनी ने यह बात मोबाइल कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी में हो रहे विकास कार्र्यो को ध्यान में रखते हुए कही है। गूगल समेत अधिकांश कंपनियां इस समय मोबाइल फोन को ही कंप्यूटर की शक्ल देने में लगी हैं। गूगल का एंड्रॉइड प्लैटफॉर्म जल्द ही ऑपरेटिंग सिस्टम की जगह लेने वाला है। इसी तरह कंपनी का क्रोम वेब ब्राउजर भी इस साल के आखिर में ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में बाजार में आएगा। कंपनी का कहना है कि इन तकनीकी बदलावों के बाद मोबाइल फोन या आईपैड जैसे कंप्यूटरों पर भी डेस्कटॉप जितने काम किए जा सकेंगे।

आतंक के खिलाफ नाक होगी मददगार एजेंसी


लंदन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय जंग में एक नया हथियार तलाशा है। यह हथियार आदमी की नाक है। बाथ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने नाक की बनावट का अध्ययन करने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है।


विशेषज्ञों का दावा है कि इससे गैरकानूनी आव्रजकों, आतंकवादियों और अपराधियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। हाई टैक स्कैनर वाली इस तकनीक को फोटो फेस के नाम से जाना जाता है। नाक पर अनुसंधान करने वाले डॉ. एड्रिअन इवैन का ने यह दावा किया है।


कैसे करेगी काम :


किसी आदमी की नाक की चार तस्वीरें विभिन्न कोणों से ली जाएगी। उसके बाद नाक की बनावट का तुलनात्मक विश्लेषण छह मुख्य आकारों रोमन, ग्रीक, नूबियन, हॉक, स्नब और टर्न अप से की जाएगी। इसके बाद हर नाक की जांच एक कंप्यूटर साफ्टवेयर की मदद से की जाएगी। सबसे ऊपरी हिस्से जहां भवें मिलती हैं, नाक अग्र हिस्से का विश्लेषण किया जाएगा।
कि आइरिस और फिंगरप्रिंट स्कैन से पहचान करने से कहीं ज्यादा नाक के आधार पर पहचानना है।

Friday, April 2, 2010

सिनेमा आपकी जेब में


लंदन. आईफोन पर वीडियो शूट करने के बाद उसे बड़े परदे पर देखना बड़ा सुखद है। इसमें आपकी मदद करेगा मिली आईफोन प्रोजैक्टर। यह वीडियो, फोटो और पॉडकास्ट को 70 इंच की स्क्रीन पर दिखाएगा। यूएसबी के जरिए मोबाइल से कनैक्ट कर आप बड़े परदे पर डेढ़ घंटे तक फिल्म देख सकते हैं। इस साल के अंत तक इसे दुनियाभर के बाजार में पेश किया जाएगा।

पिकनिक’ की मदद से ऑनलाइन एडिट करें फोटो


सैन फ्रांसिस्को. ऑनलाइन फोटो शेयरिंग के लिए अमूमन फोटो शॉप या ऐसे किसी सॉफ्टवेयर की मदद लेनी पड़ती है। यूजर्स के लिए यह बड़ा सिरदर्द है, क्योंकि उन्हें यह मालूम नहीं होता कि उनकी फोटो भेजने के उपयुक्त है या नहीं। गूगल ने ऑनलाइन फोटो एडिटिंग साइट पिकनिक का अधिग्रहण कर यूजर्स की समस्या सुलझा दी है। अब आप पिकनिक पर अपने सारे फोटो ऑनलाइन एडिट कर सकेंगे। आपको पिक्सेल और साइज आदि के बारे में गाइडलाइन भी मिलेगी। फोटो की फिनिशिंग और बैकग्राउंड के लिए भी वैबसाइट ऑनलाइन सलाह उपलब्ध कराएगा। गूगल से जुड़ने के बाद इस वैबसाइट की उपयोगिता बढ़ जाएगी।

गूगल क्रोम के जरिए कीजिए वैबसाइट का ट्रांसलेशन


वॉशिंगटन. गूगल का नया वेब ब्राउजर क्रोम दो नए फीचर्स के साथ सामने आया है। एक तो इसमें प्रायवेसी कंट्रोल लगाया गया है, साथ ही यह अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं की वैबसाइटों को अपने आप ट्रांसलेट भी कर सकता है। इसके लिए यूजर को पहले ही यह बताना होगा कि वह जो भी साइट खोलेगा, उसके हर वेब पेज को किस भाषा में अनुवाद करना है तभी उसे सही तरीके से मदद मिल पाएगी। गूगल क्रोम में संबंधित देश विशेष के हिसाब से ऐसे कई फीचर्स पहले ही जोड़े गए हैं, जिनकी बदौलत विदेशी पर्यटकों को उस देश के बारे में जानने, शॉपिंग, मुद्रा के परिवर्तनीय मूल्य आदि के बारे में मदद मिलती है।
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फेसबुक, ट्विटर खोलेगा आपके राज


लंदन. आपने यदि फेसबुक, ट्विटर या ऑकरुट पर अपने प्रोफाइल में मूल फोटो भी लगाया हुआ है, तो समझिए आपका राज खुल गया। इससे कोई भी अपने मोबाइल पर आपकी तस्वीर खींचकर नाम, फोन नंबर और यहां तक कि घर का पता भी जान सकता है। यह कमाल एक नए सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन का है। इसे अपने मोबाइल में डाउनलोड कर आप किसी भी अजनबी शख्स की तस्वीर खींचने के बाद महज एक बटन दबाने पर उसकी सारी जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। यह एप्लीकेशन पांच मेगापिक्सल वाले कैमराफोन में ही काम करता है। इसे बनाने वाले ऑक्सफोर्ड इंटरनैट इंस्टीच्यूट के डॉ. ईयान ब्राउन कहते हैं कि प्रायवेसी सुरक्षित रखनी हो तो उसे सोशल नैटवर्किग साइटों पर जानकारियों को निजी रखना चाहिए।

‘स्किनपुट’ कलाई को बना देता है टचस्क्रीन


न्यूयॉर्क. अब मोबाइल टचस्क्रीन का जमाना पुराना होने जा रहा है। वैज्ञानिक, मानव शरीर को ही मोबाइल की स्क्रीन के तौर पर उपयोग करने के लिए ‘स्किनपुट’ नाम काएक गैजेट तैयार कर रहे हैं। इस गैजेट को कलाई में घड़ी की तरह पहना जाएगा। इसके बाद आपका हाथ, बाजू और शरीर के कई अंग मोबाइल की टचस्क्रीन की तरह काम करेंगे।


माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च और कॉर्नेज मेलन यूनिवर्सिटी के कुछ वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट पर एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस गैजेट के साथ ही एक मिनी प्रोजेक्टर लगा है। इसमें लगा विशेष सेंसर आपको बताएगा कि कलाई के कौन से हिस्से को थपथपाना है।


वर्तमान में ध्वनि डिटेक्टर की सहायता से रिसर्चरों ने त्वचा के पांच हिस्सों को खोजा है, जो स्मार्टफोन प्रोग्राम एप्लीकेशन के रूप में स्कीन टचस्क्रीन का काम कर सकते हैं। रिसर्चरों का मानना है कि स्किनपुट गैजेट चलते और दौड़ते समय अधिक अच्छा काम करता है। जिन २२ सहायकों पर यह टेस्ट किया गया है उनका मानना है कि इस गैजेट की सहायता से शरीर के अंगों को ही टचस्क्रीन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। टीम इस रिसर्च को अप्रैल महीने में ‘कंप्युटर-ह्युमन इंटरेक्शन मीटिंग’ अटलांटा (जियोर्जिया) में प्रस्तुत करने की योजना बना रहे हैं।

अनुमान से पहले अस्तित्व में आए थे डायनासोर


लंदन. डायनासोरों के बारे में जितना सोचा जाता है, वे उससे भी कई साल पहले अस्तित्व में आए थे। एक नए शोध में यह पता चला है। जीवाश्म विज्ञानियों ने अपने शोध में प्रागैतिहासिक जीवों के चार टांगों वाले पूर्वज के जीवाश्म पाए हैं। ये जानवर 25 करोड़ साल पहले पाए जाते थे। यह डायनासोर के अस्तित्व से एक करोड़ साल पहले का समय है।


ऐसा माना जाता है कि मीट खाने वाले इन जानवरों का डायनासोर से वही रिश्ता है, जैसा बंदरों का मानवों से है। पूर्वी अफ्रीका के शहर तंजानिया में मिले इन जीवाश्मों का आकलन करने वाले वैज्ञानिकों ने इन जीवों को ‘प्रोटोसोर’ नाम दिया है। शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि डायनासोर और उनके करीबी रिश्तेदार जैसे कि पटेरोसोर्स और पटेरोडैकटाइल्स भी अनुमानित से काफी समय पहले अस्तित्व में आए होंगे।


इस नई प्रजाति एसिलसोर्स नोग्वे का वर्णन टैक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. स्टर्लिग नेसबिट ने नेचर पत्रिका में किया है। एसिलसोर्स डायनासोरों का ही एक समूह है जिसे सिलेसोर्स कहा जाता है। सिलेसोर्स को डायनासोर्स जैसा माना जाता है क्योंकि इनकी काफी विशेषताएं उनके जैसी होती हैं, हालांकि इनमें वे प्रमुख विशेषताएं नहीं होती, जो सभी डायनासोरों में पाई जाती हैं।

मुसोलिनी को हरा सकते हैं बलरुस्कोनी


इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बलरुस्कोनी पूर्व तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दरअसल यहां बात आइफोन एप्लिकेशन की हो रही है। अब बर्लुस्कोनी पर आधारित एप्लिकेशन बाजार में आ गई है और लोग इसे पसंद कर रहे हैं। एप्पल आइफोन की इस ताजा एप्लिकेशन से यूजर्स प्रधानमंत्री के शेड्यूल को जान सकते हैं। मतलब उन्हें पहले से पता होगा कि प्रधानमंत्री कब किस स्थान का दौरा करेंगे या फिर किससे मुलाकात करेंगे?


बलरुस्कोनी की एप्लिकेशन बाजार में आते ही देश की सबसे अधिक डाउनलोड की जाने वाली आइफोन एप्लिकेशंस में शामिल हो गई है। आइफोन कस्टमर सर्टिफिकेशन सिस्टम की रैटिंग के आधार पर इसे 5 स्टार में से 4 हासिल हुए हैं। हालांकि अब तक आई एप्लिकेशंस में बलरुस्कोनी के सेक्स स्कैंडल विवाद से जुड़ा फुटेज नहीं है।


वैसे बलरुस्कोनी की इस एप्लिकेशन को बनाने वाले शख्स का पता अभी नहीं चल पाया है। उधर, सरकार भी इससे जुड़े होने की बात से इनकार कर रही है। इससे पहले जनवरी में लुइगी मैरिनो ने मुसोलिनी पर एप्लिकेशन बनाई थी। बाजार में आते ही तानाशाह के भाषणों वाला यह क्लिपिंग देश की दूसरी सबसे अधिक डाउनलोड की जाने वाली एप्लिकेशन बन गई थी। इसमें तानाशाह के भाषणों की क्लिपिंग और कुछ ऐतिहासिक वीडियोज शामिल हैं। प्रत्येक दिन इसे कम से कम 1000 लोग डाउनलोड कर रहे हैं।


उधर बलरुस्कोनी की एप्लिकेशन की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे मुसोलिनी को पीछेछोड़ सकते हैं। इस मामले में सरकार ने फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आर्किटेक्ट की मदद करेगा सॉफ्टवेयर

वॉशिंगटन. कार्डिफ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है, जो आर्किटेक्ट्स को कमरे में अवांछित आवाजों को कम करने में मदद करता है। यह सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट की बनाई डिजाइन में यह पता लगाता है कि कहां शोर होगा और किस जगह पर आवाज साफ सुनाई देगी। इस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर अब आर्किटेक्ट थिएटर, कंसर्ट हॉल, कैफे या रिसेप्शन सेंटरों की बेहतर डिजाइन बना सकेंगे। यह सॉफ्टवेयर कमरे या हॉल में प्रतिध्वनि की जगह और दिशा भी बता सकता है। सॉफ्टवेयर को बनाने वाले प्रो. जॉन कलिंग ने बताया कि यह आर्किटेक्ट्स को अपने डिजाइन में ध्वनि विज्ञान को और गहराई से देखने में मदद करेगा।

Thursday, April 1, 2010

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हीटर का काम करेगा आपका शरीर



वॉशिंगटन. ठंड के दिनों में कमरे को गर्म रखने में काफी बिजली खर्च होती है। लेकिन अब आपका शरीर ही कमरे को गर्म करने के लिए काफी होगा। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और सांडिया नेशनल लैबोरेटरीज के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नैनोमटीरियल बनाया है, जिसे कमरे की दीवारों पर पेंट की तरह पोतकर आप सर्दी के दिनों में उसे खासा गर्म रख सकेंगे। यह मटीरियल गर्मी जरा भी नहीं सोखता, बल्कि उसे विपरीत दिशा में परावर्तित कर देता है। यहां तक कि कमरे में लगे टीवी, म्यूजिक सिस्टम से निकलने वाली ध्वनि तरंगों को भी यह हीट वेव में बदल देता है। आपके शरीर की गर्मी से भी यह कमरे का तापमान बढ़ा सकता है।

घायल सैनिकों की मदद करेंगे रोबोट


लंदन. जंग के मैदान में घायल हुए जवानों को फौरन राहत नहीं मिलने पर उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए अमेरिकी सेना घायल सैनिकों को जंग के मैदान से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रोबोट्स की मदद लेने पर विचार कर रही है।


इस तकनीक को आग, भूकंप आदि विपदाओं के समय भी लोगों की जान बचाने के लिए उपयोग में लाया जाएगा। अमेरिकी सेना के लिए ऐसे रोबोट बनाए जा रहे हैं, जो मजबूत हाथों वाले होंगे। वे खुद ही यह पता लगा लेंगे कि घायल जवान कहां पर हैं और उन्हें किस तरह की मदद चाहिए। ऐसे रोबोट्स को जंग के मैदान की भौगोलिक स्थिति के बारे में पहले से पता होगा। उनके पास इलाज के अत्याधुनिक साधन भी होंगे।

शनि के चंद्रमा की हैरतअंगेज तस्वीरें


वाशिंगटन शनि ग्रह के बर्फीले चंद्रमा ‘ऐनसेलेडस’ की तस्वीरों में द्रव और गैस की धाराओं को देखकर नासा के वैज्ञानिक चकित रह गए हैं। ये धाराएं ऐनसेलेडस के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र की प्रमुख दरार से निकलती प्रतीत हो रही हैं।


कैलिफोर्निया स्थित नासा की जेट प्रोपल्सन प्रयोगशाला में कैसिनी प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक बॅाब पैपलाडरे के अनुसार ‘‘ऐनसेलेडस से चकित करने वाली जानकारी का सिलसिला जारी है। कैसिनी के हर अभियान से हम इसके बारे में गूढ़ जानकारी प्राप्त करते हैं और यह इसे विचित्र बनाता है।’’


कैसिनी से 14 हजार किलोमीटर की दूरी से ऐनसेलेडस की नवंबर में ली गई इन तस्वीरों से इस दरार के बारे में सबसे विस्तृत तापीय नक्शा मिलने की संभावना है। नासा ने कहा कि इमेजिंग साइंस सबसिस्टम और कंपोजिट इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर द्बारा ली गई तस्वीरों में ‘टाइगर स्ट्रिप’ की ली गई सर्वश्रेष्ठ थ्री डायमेंसनल तस्वीरें शामिल हैं। यह एक छेद सरीखा है जिससे बर्फ के कण, जलवाष्प और जैविक यौगिक निकलते प्रतीत होते हैं।

चेक की फोटो से निकालें पैसे



जल्दी ही आपको चेक भुनाने के लिए बैंक तक नहीं जाना पड़ेगा। यहां बैंक ऑफ अमेरिका और सिटी बैंक इसी साल से एक ऐसी प्रणाली शुरू कर रहा है, जिसमें आपको अपने मोबाइल पर चेक की तस्वीरें खींचनी होंगी। चेक के आगे और पीछे की इन तस्वीरों से आईफोन या अन्य मोबाइल में मौजूद एप्लीकेशन उसमें लिखी रकम, चेक नंबर, आखिर की संख्याओं, चेक लिखने वाले के एकाउंट की जानकारी और संबंधित बैंक के बारे में सब पता लगा लेगा। चेक के पीछे किए गए हस्ताक्षर को भी यह चेक करेगा। यह सारी जानकारी बैंक तक पहुंचने पर क्लियरिंग हाउस फंड ट्रांसफर कर देगा।

कूड़े से बनेगी स्पेन में सात फीसदी बिजली


वॉशिंगटन. जारागोजा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उनके बनाए नए सिस्टम से स्पेन में सात फीसदी बिजली कूड़े से बनाई जा सकेगी। यह बिजली ठोस कचरे, जलशोधन संयंत्र से निकले अवशिष्ट और जैविक कचरे से पैदा होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह से बनी बिजली पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली और सस्ती होगी। वैज्ञानिकों ने कहा कि फिलहाल स्पेन में कूड़ा जहां फेंका जाता है, वहां से भारी मात्रा में मीथेन गैस निकलती है। लेकिन यदि इस कचरे को जलाकर बिजली बनाई जाए तो इससे न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि लोगों को अत्यधिक कम खर्च पर बिजली मिल सकेगी।

एलसीडी पर लिखिए जो चाहें


लंदन. बच्चों को क्लास में समझाने के लिए बूगी बोर्ड पेपरलेस एलसीडी राइटिंग टैबलेट का जवाब नहीं। नौ इंच लंबे और छह इंच चौड़े इसके प्रेशर सेंसिटिव स्क्रीन पर खास पेन की मदद से आप जो चाहे लिख सकते हैं। यह टेक्स्ट के साथ फोटो भी डिस्पले करता है। इसमें एक फ्लैश मेमोरी और यूएसबी कनेक्टिविटी भी दी गई है। इससे आप लिखी हुई बातों को कंप्यूटर पर दर्ज कर सकेंगे। अपने लिखे हुए को आप स्क्रीन छूकर जब चाहे मिटा सकते हैं। इसकी कीमत 30 से 50 डॉलर (1410-2350 रु.) है।

गए चित्रों में पाया ग

  लंदन. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनि के चंद्रमा ए
नसेलॉडस पर जीवन की संभावना जताई है। इसकी सतह 
के नीचे पानी होने के नए साक्ष्य मिलने के बाद यह दावा 
किया गया है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, शनि के चंद्रमा पर भेजे गए सेसि
नी यान ने इसके बर्फीले ज्वालामुखी से निकले बादलों  
के बीच से गुजरकर जल के अणुओं का पता लगाया है
। इस खोज से एनसेलॉडस की सतह के नीचे समुद्र हो
ने की संभावना बढ़ गई है।

पृथ्वी पर भी ये अणु प्राकृतिक झरनों या समुद्र की 
लहरों 

 
में पाए जाते हैं। ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर एनसेलॉडस पर पानी है तो शनि के इस छठे सबसे बड़े चंद्रमा में जीवन के लिए उपयोगी परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं।

सेसिनी द्वारा लिए गए चित्रों में पाया गया

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180 डिग्री की मूवी स्क्रीन


बर्लिन. अब आप 180 डिग्री हाई रिजॉल्यूशन स्क्रीन पर मूवी देख सकते हैं। फ्रॉनहॉपर हिनरिच हट्र्ज इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने 3.35 गुणा 12 मीटर की एक मूवी स्क्रीन बनाई है, जो 180 डिग्री एंगल पर तस्वीरों को फैला सकती है। इसकी पिक्चर क्वालिटी और साउंड सिस्टम भी गजब का है। इसके लिए एफ32 डीएलपी प्रोजेक्टरों का इंतजाम भी किया गया है। स्क्रीन का रिजॉल्यूशन सात मेगापिक्सेल है। यह सिस्टम इमेज को लंबे टुकड़ों में काटकर उन्हें खास तौर पर बनाए गई मुड़ी हुई सतह पर जोड़ देता है।

दर्द दूर करेगी अल्ट्रासाउंड मशीन


लॉस एंजिलिस. कॉरनेल यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के एक छात्र ने जेब में समाने वाला एक ऐसा अल्ट्रासाउंड उपकरण बनाया है, जो चोट, मोच और जोड़ों के दर्द में राहत देता है। इसमें त्वचा से होकर अल्ट्रासाउंड किरणों भेजने वाला सिक्के के आकार का ट्रांसड्यूसर लगा है। इसे दर्द वाली जगह पर 10 घंटे तक लगाया रखा जा सकता है।

अब मोबाइल पर भी इंटरकॉम!


नई दिल्ली. आपने अपने कार्यालय या आवासीय परिसर में लैंडलाइन फोन पर इंटरकॉम की सुविधा जरूर हासिल की होगी। कई बार आपने सोचा होगा कि काश यह सेवा मोबाइल पर मिल जाती तो कितना अच्छा होता। इससे अपने इंटरकॉम नंबर के पास चिपक कर रहने की बाध्यता भी नहीं रहती। आने वाले समय में संभवत: आपकी इच्छा पूरी हो जाए।

आप अपने आवासीय परिसर या फिर कार्यालय में अपने मोबाइल फोन पर भी इंटरकॉम सेवा हासिल कर पाएंगे। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सौ से अधिक देशों में डीईसीटी (डिजिटल इनहांसड कॉरडलेस टेलीकम्युनिकेशन) तकनीक पर उपलबध कराई जा रही इस तरह की सेवा पर राय आमंत्रित की है।

सौदा लाभ का

डीईसीटी की भारत स्थित इकाई की ओर से ट्राई को भेजे गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि मोबाइल लगातार बढ़ रहे हैं। लोग अपने आवासीय परिसर या कार्यालय परिसर में ही मौजूद दूसरे व्यक्ति से बातचीत के लिए मोबाइल फोन से कॉल करता है। करीब साठ प्रतिशत कॉल इन-बिल्डिंग या इन काम्पलैक्स होते हैं। ऐसे में अगर मोबाइल फोन पर इंटरकॉम की सुविधा मिल जाए तो इससे परिसरों के अंदर मोबाइल नेटवर्क जाम होने की समस्या भी खत्म हो जाएगी। साथ ही इन-बिल्डिंग कॉल करने के एवज में ग्राहक की जेब से जाने वाली राशि की भी बचत होगी। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की सेवा के लिए अलग बैंड में स्पेक्ट्रम मुफ्त उपलब्ध कराया जाए, जिससे लोग लाइसेंस के झंझट से मुक्त इस प्रणाली को अपनाएं।

तो गांव-मोहल्लों में भी खुलेगी राह

ट्राई के एक अधिकारी ने कहा कि अगर इन बिल्डिंग के लिए मोबाइल पर इंटरकॉम की सुविधा शुरू होती है तो आने वाले समय मंे यह सेवा गांव या किसी मोहल्ले में भी शुरू हो सकती है।

ऐसे करेगा काम

इस तकनीक के तहत आवासीय परिसर या बड़े औद्योगिक-कार्यालय परिसर को एक निश्चित बैंड पर मुफ्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा। इन परिसरों या परिसर के नियंत्रक, प्राधिकार प्राप्त कंपनी-समूह सामान्य इंटरकॉम नंबरों की तरह मोबाइल पर चलने वाली इंटरकॉम सेवा के लिए नंबर जारी कर सकेंगे। इस सेवा की एक खासियत यह भी होगी कि इंटरकॉम नंबर आपके मोबाइल के साथ ही आपके लैंडलाइन पर भी काम करेंगे। ऐसे मंे अगर आप घर या कार्यालय परिसर में अपनी सीट पर हैं तो आप अपने लैंडलाइन फोन पर भी बात कर पाएंगे। जबकि लैंडलाइन फोन के पास ना होने पर मोबाइल पर इंटरकॉम कॉल रिसीव कर पाएंगे।

बुजुर्र्गो के लिए बना मोबाइल


पेरिस । बुजुर्र्गो की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए साजेम कंपनी ने कोजीफोन नाम का नया मोबाइल तैयार किया है। इसका की-पैड बड़ा है, साथ ही इसमें कॉल या दोस्तों को टेक्स्ट मैसेज भेजने के लिए अलग से बटन दिए हुए हैं। इसमें एक मेमोरी कार्ड भी अलग से डाला जा सकता है, जिसमें बुजुर्र्गो के स्वास्थ्य, उनकी बीमारी की जानकारी, डॉक्टरों, संबंधियों और दोस्तों के फोन नंबर आदि फीड किए जा सकते हैं। इसका डिस्प्ले बड़ा है, ताकि आसानी से पढ़ा जा सके। अभी इस फोन को बाजार में पेश नहीं किया गया है। इसके लिए दुनियाभर के नेटवर्क ऑपरेटरों से बात की जा रही है।

दिमाग से कंट्रोल होगी कार


लॉस एंजिलिस. भविष्य की कारों को चलाने के लिए स्टियरिंग व ड्राइवर की नहीं, बल्कि आपके दिमाग की जरूरत होगी। इसे साकार किया गया है मर्सिडीज की एफ 400 कॉन्सेप्ट कार में। डेरेक चिक किन एनजी की डिजाइन की हुई इस कार में सवार व्यक्ति को एक हेलमेट पहनना पड़ता है।

इसमें लगा ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस दिमाग की तरंगों को पकड़कर कार को निर्देशित करता है। इस कार में दो लोग सवार हो सकते हैं। कार में कुछ और फीचर्स जोड़ने के लिए अलग से सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। इस कार का इसी साल ट्रायल किया जाएगा।

ड्राइव करते हुए भेजें वॉइस टेक्स्ट


वॉशिंगटन. ड्राइविंग करते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल जोखिम भरा है। इसके बावजूद लोग रोज खतरा मोल लेते हैं। इसे देखते हुए क्लेमसन स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग के अध्यक्ष प्रो. जुआन गिल्बर्ट ने वॉइस टेक्स्ट नामक नया एप्लीकेशन पेश किया है।

इसमें ड्राइवर गाड़ी चलाते हुए सिर्फ बोलकर टेक्स्ट मैसेज भेज सकता है। इसके लिए ब्लूटूथ का उपयोग करना होगा। वह बोलकर संबंधित व्यक्ति को टेक्स्ट मैसेज भेज सकेगा। इसी तरह दूसरी तरफ से आने वाले टेक्स्ट मैसेज शब्दों में बदलकर यूजर को वॉइस के रूप में सुनाई देंगे।

ड्राइव करते हुए भेजें वॉइस टेक्स्ट

वॉशिंगटन. ड्राइविंग करते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल जोखिम भरा है। इसके बावजूद लोग रोज खतरा मोल लेते हैं। इसे देखते हुए क्लेमसन स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग के अध्यक्ष प्रो. जुआन गिल्बर्ट ने वॉइस टेक्स्ट नामक नया एप्लीकेशन पेश किया है।

इसमें ड्राइवर गाड़ी चलाते हुए सिर्फ बोलकर टेक्स्ट मैसेज भेज सकता है। इसके लिए ब्लूटूथ का उपयोग करना होगा। वह बोलकर संबंधित व्यक्ति को टेक्स्ट मैसेज भेज सकेगा। इसी तरह दूसरी तरफ से आने वाले टेक्स्ट मैसेज शब्दों में बदलकर यूजर को वॉइस के रूप में सुनाई देंगे।

लैब में तैयार किया चालीस खरब डिग्री तापमान


वॉशिंगटन.अमेरिका में वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रयोगशाला में 40 खरब डिग्री सेल्सियस तक का तापमान पैदा किया है। इस तापमान में पदार्थ टूटकर द्रव्य रूप में पहुंच जाता है। ब्रrांड की उत्पत्ति के बाद माइक्रो सेकंड तक पदार्थ इसी रूप में था।

इसके लिए वैज्ञानिकों ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के ब्रूकहैवेन नेशनल लेबोरेटरी में अणु को तोड़ने के लिए विशाल यंत्र का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया से अत्यधिक गर्म विस्फोट हुआ जो कुछ मिली सेकंड तक ही रहा। लेबोरेटरी के स्टीवन बिगडर ने बताया कि चंद सेकंड के इस परिणाम से भौतिक विज्ञानियों को इस बात को समझने में मदद मिलेगी कि ब्रrांड की उत्पत्ति कैसे हुई। भौतिक विज्ञानी वर्षो से ब्रrांड की उत्पत्ति की गुत्थी सुलझाने में लगे हुए हैं।

वैज्ञानिक उस गुत्थी को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें शुरुआती पदार्थ गर्म तरल से ठोस बन गया। इस निष्कर्ष के जरिये वैज्ञानिक अपेक्षाकृत छोटे और तेज चलने वाले और शक्तिशाली कम्प्यू¨टग उपकरण बनाने के लिए स्पिनट्रोनिक्स क्षेत्र में भी इस्तेमाल की योजना बना रहे हैं। वैज्ञानिकों ने स्वर्ण आयन को अरबों बार टकराकर इस तापमान को पैदा किया। इसके लिए रिलैटिविस्टिक हेवी आयन कोलाइडर का इस्तेमाल किया गया। कोलाइडर को ब्रह्मांड की उत्पत्ति के समय के तापमान में पदार्थ की उत्पत्ति के लिए खासतौर पर तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि चालीस खरब डिग्री के आसपास का तापमान पैदा कर लिया।

आईपैड को पछाड़ देगा हमारा ‘एडम’


हैदराबाद. एप्पल के हाल में पेश आईपैड को कई खामियों के कारण खास तवज्जो नहीं दी थी। लेकिन अब भारत में इससे कहीं बेहतर और उन्नत टैबलेट पीसी आ गया है। स्पेन के बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में रविवार को पेश किए गए एडम टैबलेट पीसी को पहली बार टेग्रा 2 चिप और पिक्सेल क्यू आई स्क्रीन के रूप में दो हिस्सों में बनाया है। बैटरी की खपत 50 फीसदी कम होगी। यहां की नोशन इंकॉपरेरेटिव कंपनी के एक टचस्क्रीन कंप्यूटर में 10 इंच स्क्रीन को ड्यूअल मोड दिया गया है। इससे आप सूर्य की रोशनी में भी देख-पढ़ सकेंगे। साथ ही फुल हाईडेफिनिशन वीडियो, फ्लैश और वेब ब्राउजर की सुविधा है। मैगजीन और कॉमिक्स भी पढ़े जा सकते हैं। जुलाई में अमेरिका में लांच होने वाले एडम आईपैड की कीमत आईपैड से कम होगी।

बहुत काम का है एसिएंट मोबाइल


लंदन. यह टीवी ऑन-ऑफ करेगा, कमरे की बत्तियां जलाएगा, आपको म्यूजिक सुनाएगा और ब्लू-टूथ के जरिए टीवी पर वीडियो भी दिखाएगा। एसिएंट जोन नाम के इस मोबाइल फोन की इन सारी खूबियों के इस्तेमाल के लिए आपको अलग से 1300 डॉलर खर्च करने होंगे। कमरे के एसी व पंखों से इसे कनेक्ट करने के लिए करीब 1000 डॉलर की लागत आएगी। फिर यह आपको कुर्सी से हिलने नहीं देगा।

गर्मी में जम गया पानी

वॉशिंगटन. आमतौर पर गर्मी में बर्फ पिघल जाती है, लेकिन इजरायल के वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने क्वासी एमॉरफस पायरोलेक्टिक फिल्म की मदद से पानी को गर्म कर बर्फ में बदलने का कारनामा कर दिखाया है। असल में यह पतली फिल्म का कमाल है, जो पानी के अणुओं का आवेश बदल देती है। जैसे ही फिल्म को पॉजिटिव चार्ज किया जाता है, गर्म होने पर वह बर्फ में बदल जाती है। निगेटिव चार्ज करने पर असर उल्टा होता है। इस प्रयोग की सफलता से भविष्य में धरती को ग्लोबल वॉर्मिग से बचाने में मदद मिल सकती है।

अब गूगल देगा सुपर स्पीड इंटरनेट कनेक्शन


इंटरनेट संबंधी सेवाएं देने में वाली प्रसिद्ध कंपनी गूगल अब नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर बनने की दौर में है। इसकी शुरूआत अमेरिका के पांच लाख घरों में सुपर स्पीड कनेक्शन देगे से होगी। कंपनी ने इसके लिए फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने जा रही है।

गूगल का कहना है कि उसके कनेक्शन की स्पीड एक जीबीपीएस (गीगाबाइट प्रति सेकेंड) होगी, यह पहला मौका है जब इतने तेज इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होंगे। स्पीड में मामले में दूसरों से सौ गूना अधिक तेज होने पर भी कंपनी की यह कोशिश है कि इसकी कीमत कम रखी जाए ताकि मौजूदा सर्विस प्रोवाइडरों को टक्कर देना संभव हो।

गूगल की योजना इस सेवा को सरकारी दफ्तरों से लेकर आम लोगों तक पहुंचाने की है। गौरतलब है कि गुगल पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह इंटरनेट से जुड़े सभी क्षेत्रों में अपने पैर फैलाना चाहता है।

फेसबुक-ट्विटर से भिड़ेगा गूगल का ‘बज’


लंदन. यदि आप फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किग साइट्स के जरिए नए लोगों से मेलजोल बढ़ाते हैं तो अब इस काम में आपकी मदद गूगल भी करेगा। जी हां, गूगल ने फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किग साइट्स से मुकाबला करने के लिए अपने सोशल नेटवर्क बज को पेश किया है।

इसे गूगल की जी-मेल सेवा से जोड़ा गया है, जिसमें रजिस्टर्ड यूजर को सूचनाओं व अन्य कंटेंट के आदान-प्रदान और दोस्तों से चैटिंग की सुविधा मिलेगी। बज में मोबाइल यूजर्स के लिए कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं।

बज के प्रोडक्ट मैनेजर टॉड जैकसन कहते हैं कि इस नए सोशल नेटवर्किग साइट को जी-मेल के साथ कुछ इस तरह से जोड़ा गया है कि अब तक गूगल मेल का उपयोग कर रहे लोगों को कंटेंट की शेयरिंग के लिए अलग से मेल रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। उन्हें बज पर ही ई-मेल और अन्य सभी सुविधाएं मिल जाएंगी।

अब सूर्य के लिए नासा की दूरबीन

अमरीकी अंतरिक्ष केंद्र नासा सूर्य के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष में एक दूरबीन स्थापित करने जा रहा है. यह दूरबीन वैज्ञानिकों को हाई रिज़ोल्यूशन तस्वीरें भेजेगा जिसके सहारे वे यह अध्ययन कर सकेंगे कि सूर्य की गतिविधियाँ किस तरह की हैं. इसमें उन चुंबकीय शक्तियों का अध्ययन किया जाएगा जिससे सूर्य में धब्बे दिखाई देते हैं और सूर्य धधकता है, जिसकी वजह से संचार व्यवस्था, सैटेलाइट और विद्युत उपकरण काम करना बंद कर सकते हैं. 'सोलर डायनामिक ऑब्ज़र्वेटरी' का मिशन पाँच साल का होगा और यह हर 24 घंटे में पृथ्वी की परिक्रमा करेगा.बदलता सितारा सूर्य एक ऐसा सितारा है जो हमेशा बदलता रहता है. कभी वह शांत रहता है तो कभी एकाएक धधकने लगता है और ऐसे लाखों निवेशित कण विसर्जित करता है जिससे कि पृथ्वी कर विद्युत और संचार तंत्र काम करना बंद कर सकते हैं. सूर्य की इन गतिविधियों के पीछ उसका शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र है जिसमें बहुत अधिक ऊर्जा समाई होती है और जब वे इसे छोड़ते हैं तो तेज़ किरणें पैदा होती हैं. यह दूरबीन सेकेंड के हर तीसरे हिस्से में पूरे सूर्य की हाई डेफ़िनिशन तस्वीरें खींचेगा. इस दूरबीन की तस्वीरें किसी हाई डैफ़िनिशन टीवी कैमरे की तस्वीर की तुलना में दस गुना बेहतर होंगीं. इससे वैज्ञानिक सूर्य के बारे में वो जानकारी हासिल कर सकेंगे, जो अब तक उपलब्ध नहीं है.

शनि के चंद्रमा पर मिला जीवन!


लंदन. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनि के चंद्रमा एनसेलॉडस पर जीवन की संभावना जताई है। इसकी सतह के नीचे पानी होने के नए साक्ष्य मिलने के बाद यह दावा किया गया है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, शनि के चंद्रमा पर भेजे गए सेसिनी यान ने इसके बर्फीले ज्वालामुखी से निकले बादलों के बीच से गुजरकर जल के अणुओं का पता लगाया है। इस खोज से एनसेलॉडस की सतह के नीचे समुद्र होने की संभावना बढ़ गई है।

पृथ्वी पर भी ये अणु प्राकृतिक झरनों या समुद्र की लहरों में पाए जाते हैं। ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर एनसेलॉडस पर पानी है तो शनि के इस छठे सबसे बड़े चंद्रमा में जीवन के लिए उपयोगी परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं।

सेसिनी द्वारा लिए गए चित्रों में पाया गया कि एनसेलॉडस की बर्फीली सतह पृथ्वी जैसी है। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि एनसेलॉडस के दक्षिणी ध्रुव के नीचे जो तरल पदार्थ है, वह पानी हो सकता है। नासा के वैज्ञानिक एंड्रियू कोट्स ने कहा कि अंतरिक्ष यान द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों में क ार्बन और पानी को तरल बनाए रखने वाली ऊष्मा के स्रोत जैसे जीवन के घटक शामिल हैं।